फिल्‍म रिव्‍यू : बेगम जान देखें और गम में डूब जाएं

357

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन की नई मूवी बेगम जान रिलीज हो गई. इस फिल्‍म को लेकर बहुत उम्‍मीदें बांधी जा रही थी. विद्या बालन इसके प्रमोशन के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. देश के हर प्रमुख शहरों में मीडिया के सामने पब्लिसिटी स्‍टंट किया. देर्शकों को उम्‍मीद थी कि यह एक बेहतर मूवी होगी. मॉल्‍स में बेगम जान देखने के बाद ज्‍यादातर दर्शक गमजदा नजर आए. पुरानी पटकथा पर सीरियस फिल्‍म देखने के बाद लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. फिल्‍म समीक्षकों और उनकी रेटिंग्‍स की बात करें तो वो भी निराश करती हैं.

फिल्‍म समीक्षकों की नजर में बेगम जान

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में जानी मानी समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ने इस फिल्म को डेढ़ स्टार दिया है. शुभ्रा गुप्ता ने इस फिल्म में चंकी पांडे के नकारात्मक अभिनय की तारीफ की है. एनडीटीवी में समीक्षक सैबल चटर्जी ने इस फिल्म को ढ़ाई स्टार दिए हैं और लिखा है वहीं अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस फिल्म में विद्या के अभिनय की तारीफ करते हुए इस साढ़े तीन स्टार दिए हैं.

अकेले देखें दिल में पत्‍थर रख के

बेशक- ‘बेगम जान’ की भूमिका में विद्या बालन ने जान डाल दी है. फिल्म में कई दृश्य दिल को छूते हैं, लेकिन इस फिल्म की सबसे बड़ी कमज़ोरी है कि यह बहुत ही लाउड है. मनोरंजन कम है. ज़रूरत से ज्यादा ड्रामा क्रिएट किया गया है और ज़रूरत से ज्यादा डायलॉगबाजी है. कई सीन में ज़बरदस्ती के लड़ाई-झगड़े भी मालूम पड़ते हैं जैसे खाना खाते समय कोठे की लड़कियां आपस में लड़ रही हैं. फिल्म में होली का गाना अचानक से कैसे आ जाता है समझ नहीं आता. फिल्म की लंबाई भी मुझे ज़रूरत से कुछ ज्यादा लगी.

बेगम जान आप आराम से बैठ कर नहीं देख सकते. इसमें समाज का दोहरा चरित्र दिखाया गया है. लेकिन ये आपको कंफर्ट भी देती है और सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि वो सुबह कभी तो होगी. इस फिल्म को विद्या बालन के लिए देखिए जिनकी आखें और एक एक डायलोग आपके रोंगटे खड़े कर देगा.

परफॉर्मेंस

शुरू से ही फिल्म चाहे वो विद्या बालन के आईब्रो हों या उनकी धराधड़ गालियां, वो पूरी तरह से कैरेक्टर में खुद को समा ली हैं. वो अपने काम को सबसे ज्यादा वैल्यू देती है और आजादी, बंटवारे की उन्हें कोई फिक्र नहीं है. वो जहां रहती हैं वहां की रानी हैं जो भले अपने शब्दों पर कंट्रोल ना करती हो लेकिन कठोर बेगम जान के अंदर एक बहुत ही केयरिंग दिल है. विद्या बालन ने अपने किरदार में पूरा परफेक्शन दिखाया है और हर इंटेस सीन में वो कमाल की लगी हैं.

एक सीन में वो बोलती हैं “महीना हमें गिनना आता है साहब..हर बार लाल करके जाता है”. इसके बाद पल्लवी शारदा (गुलाबो) वेश्या हैं जिनका अतीत दिल दहलाने वाला है.वो अपने रोल में कमाल की लगी हैं और विद्या बालन के साथ स्क्रीन शेयर करने में उन्होंने अपना खुद का स्थान बनाया है. गौहर खान भी रूबिना के किरदार में काफी इंप्रेस करती है. जिस सीन में वो अपनी जिंदगी के बारे में और उस इंसान के बारे में बताती हैं जिससे वो प्यार करती हैं वो शानदार है. ये आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगा हालांकि इसे सही तरीके से फिल्म में रखा नहीं गया है.

तकनीकी पक्ष

बेगम जान लिखी कहानी से ज्यादा मोमेंट्स कही कहानी है. गोपू भगत की सिनेमैटोग्राफी कमाल की है और उन्होंने बेगम जान की दुनिया को बेहतरीन तरीके से दिखाया है. फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा है लेकिन दूसरे हाफ में कई शानदार सीन है. मोनिशा बालदवा और विवेक मिश्रा को एडिटिंग पर थोड़ा सा ध्यान और देना था.

You might also like More from author

Comments

Loading...