रैंनसमवेयर अटैक होने पर बिना फिरौती के फाइल खोलने के लिए आया वॉनाकीवी टूल

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रैंनसमयवेयर वायरस से परेशान दुनिया के 150 देशों के लिए राहत की खबर है। अब एक ऐसा तरीका ढूंढ़ लिया गया है जिससे वॉनाक्राइ रैंसमयवेयर के शिकार हुए सिस्टम की फाइलों को खोला जा सकता है। जी हां, इसका दावा फ्रांस के रिसर्चर्स ने किया है। उनका कहना है कि इन तरीकों के जरिए फाइलों को बचाया जा सकता है जिन्हें एक हफ्ते में फिरौती न दिए जाने की सूरत में लॉक कर दिए जाने की धमकी दी गई है। इस टूल को रिसर्चर्स ने वॉनाकीवी नाम दिया है।

बता दें कि रैंनसमवेयर वायरस ने पिछले एक हफ्ते से दुननियाभर के 150 देशों के लाखों कंप्यूटरों को लॉक कर दिया था। अब तक इस वायरस के शिकार दुनिया भर के 3 लाख कंप्यूटर हो चुके हैं। रैंसमवेयर वायरस अपने शिकार को धमकी देता है कि अगर एक हफ्ते के अंदर 300 से 600 मिलियन डॉलर फिरौती के तौर पर नहीं दिए गए तो सिस्टम को हमेशा के लिए लॉक कर दिया जाएगा।

दुनियाभर में फैले सिक्यॉरिटी रिसर्चर्स की एक टीम इस काम के लिए साथ आई और उन्होंने मिलकर उन फाइलों को खोलने का तरीका ढूढ लिया जो इस ग्लोबल साइबर अटैक का शिकार हुई हैं। कई अन्य सिक्यॉरिटी रिसर्चर्स ने भी इस टूल के काम करने की पुष्टि की है। हालांकि रिसर्चर्स ने यह भी बताया है कि उनका तरीका कुछ खास परिस्थितियों में ही काम करेगा। जो कंप्यूटर साइबर अटैक का शिकार हुआ है, अगर उसे रीबूट नहीं किया गया हो तभी यह टूल उस पर काम करेगा। इसके अलावा वॉनाक्राइ ने अभी तक जिन कंप्यूटरों की फाइलों को हमेशा के लिए बंद नहीं किया है, यह टूल उन्हीं पर असर करेगा।

रिसर्चर्स की टीम ने दिन-रात जागकर यह टूल बनाया है क्योंकि उन्हें पता था कि वक्त ज्यादा नहीं है। उन्हें अहसास था कि वक्त बीतने के साथ फाइलों को बचाना मुश्किल होता जाएगा। फिरौती दिए बगैर अपनी फाइलों को फिर हासिल करने के इस फ्री टूल नाम ‘वॉनाकीवी’ रखा गया है।

इसे लेकर एक ब्लॉग भी लिखा गया है जिसमें इससे जुड़ी सारी तकनीकी जानकारी मौजूद है। इसे उन संस्थानों के साथ शेयर किया जाएगा जो वॉनाक्राइ से प्रभावित हुए हैं। वॉनाकीवी विंडोज 7 और विंडोज के पुराने वर्जन XP और 2003 पर काम कर रहा है। साथ ही विंडोज 2008 और विस्टा पर भी। टीम के एक सदस्य ने कहा, ‘यह तरीका XP से लेकर Win7 तक किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करना चाहिए।’ उन्होंने बताया कि अभी तक बैंकिंग और ऊर्जा संस्थानों के अलावा कई देशों की खुफिया एजेंसियों ने इसे लेकर उनसे संपर्क किया है। इनमें यूरोपीय देशों के अलावा भारत भी शामिल है।

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