यूट्यूब आतंकवाद के खिलाफ अपना रहा है नया ट्रिक, पॉलिसी में किया बदलाव

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आईएसआईएस नहीं कर सकेगा युवाओं को गुमराह

यूट्यूब ने आईएसआईएस के वीडियो सर्च करने वाले यूजर्स पर लगाम लगाने के लिए नई पॉलिसी जारी की है। इस पॉलिसी में यूजर्स अगर यूट्यूब पर हिंसक वीडियो सर्च करेंगे, तो यूट्यूब ट्रिक के जरिए उनके सामने आतंकवाद से पीड़ित लोगों के वीडियो सामने आ जाएंगे। कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा कि बड़ी संख्या में यूजर्स आईएसआईएस से जुड़ा वीडियो कंटेंट सर्च करते हैं। ये नई पॉलिसी ऐसे ही यूजर्स को ध्यान रखकर बनाई गई है।

बता दें कि ऐसे यूजर्स को कंट्रोल करने के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसी दिग्गज कंपनियां भी आतकंवाद को लेकर आलोचना का शिकार हो चुकी हैं और अपने-अपने स्तर पर इससे निबटने के प्रयास कर रही हैं। वहीं अब यूट्यूब ने भी ऐसे यूजर्स के लिए पॉलिसी बना ली है।

यूट्यूब ने कहा कि अगर यूजर्स आईएसआईएस जैसा कोई भी कीबर्ड टाइप करेंगे, तो रिडाइरेक्ट होकर उनके सामने आतंकवाद के शिकार लोगों की वीडियो सामने आ जाएंगी।

Iris Scan कंपनी ने अपने ब्लॉगपोस्ट में कहा कि यूजर्स जब आईएसआईएस में भर्ती और इससे जुड़े कटेंट को सर्च करेंगे तो कंपनी रिडाइरेक्ट पॉलिसी के जरिए उनके सामने इन वीडियो का खंडन करने वाली वीडियो की प्लेलिस्ट डिस्प्ले कर देंगे।

कंपनी ने अपने बयान में ये भी बताया कि इसके जरिए आईएसआईएस की तरफ आकर्षित होने वाले यूजर्स के माइंडसेट को बदलने में ये पॉलिसी काम आएगी। बता दें कि पिछले कुछ समय से यूट्यूब के जरिए युवा आईएसआईएस के वीडियो सर्च कर रहे हैं और उनकी तरफ रुझान दिखा रहे हैं।

बता दें कि यूट्यूब ने पहले ही हिंसक और रंगभेद दर्शाने वाले वीडियो अपलोड करने पर रोक लगा रखी है। हालांकि यूट्यूब की इस पॉलिसी पर सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं। कुछ डिजीटल प्राइवेसी एक्सपर्ट का कहना है कि इन सभी पॉलिसी के जरिए कंपनी यूजर्स के ऊपर नजर रख रही है, जो उनके निजता के अधिकार का हनन है।

इसके अलावा यूजर्स की सर्च हिस्ट्री के आधार पर विज्ञापन दिखाने वाली पॉलिसी पर भी सवाल किए जा रहे हैं, लेकिन कंपनी फिलहाल इस पॉलिसी को यूजर्स के लिए जरूरी मान रही है।

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